दिय भक्ति के दान जगदम्बे, हम जेबई कतऽ हे अम्बे नाव डूबल छै बीच भवरमे, आब शक्ति नहि छै कमर में ! अबला के सहारा है अम्चे । हम जैबई कतऽ हे जगदम्बे 1 पुत्र गलती अनेको करय छै, जेकर माता ...
अहाँ जगत-जननी महतारी छी कालिका दुलारी छी ना ।। अहाँ छिअइ मिथिला बासी । हम सब वसी मिथिला काशी हम त अहाँके चरण के पुजारी छी कालिका दुलारी छी ना । अहाँ बसी मिथिला देश हम सब कटड छ...
को भेल हमर गलती, कीये वीसरि गेलौंह माता ।। बचपन के मति अछि माँ, कनी ज्ञान सुधारु ने की। दुख सहलो ने जाइए माँ, हम नोर चुबाबई छी । हे काली खप्पर मईया, कनी नेत सुधारू ने की।।। दुख सह...
कतेक दुख सुनाथ हे कतेक दुख सुनायब । तंत्र-मंत्रएको महान की कहि अहाँ के सुनायब हे जननी की कहि आह के सुनायब मूर्ख एक पुत्र अहाँ के भुतियल रखबनि संग लगाय हे जननी कतेक दुख सुना...
मइया आबि रहल छथि हुनकर नुपूर रुनझुन बाजैन हे । सिंह चढ़ल एक कमल विराजित ताहि ऊपर खप्पर लेने है कारी केश हुनक अति सुन्दर धरती लोटन है। रुण्ड मुण्ड सँ देह नुकौने रूप बनौने हे ...
खोलने केबार खोलू ने केबार है जननी, खोल के केवार माँ के द्वार पर फूल नेने ठाढ़ छी........ पूजा करब तोहार हे जननी, पूजा करब तोहार माँ के द्वार पर धूप नेने ठाढ़ छी........ आरती उतारब तोहार हे ज...
कोन फूल पियर हे माता कोन फूल लाल हे । कोन फूल पहिरन माँ के कोन फूल सिंगार हे । चम्पा फूल पियर हे माता ओढ़हुल फूल लाल है । बेली फूल पहिरन माँ के चमेली फूल सिंगार है । पहिरिये ओढी...
जगदम्बा हे ले के खबरिया हमार । जखन जगदम्बा मइया घरसौं बहार भेली । जगदम्बा हे कोरिया काया लय जगदम्बा है ली दे खबरिया हमार 1 जखन जगदम्बा मइया आगन सौ बहार के 1 जगदम्बा है अन्हरा ...
मैया सिंहक पीठ सबार, हम सब करइ छी पुकार । अहाँ दुखिया के दुख हरब कोना । हम सब फूल नेने ठाढ, अहाँ खोलू ने किवाड़ । हम सब अहाँ के फूल चढेब कोना । हम सब नैवेद्य नेने ठाढ़, अहाँ खोलू न...
अम्बे अम्बे जय जगदम्बे, जय-जयकार करे छी हे तीन भुवन के मात् अहाँ छी, तीन नयनसँ तक छी है। सिंह पर एक कमल राजित, ताहि ऊपर बैसल छी हे । भूत प्रेत सभ झालि बजाय, योगिन के नचबइ छी है। रा...
है जगदम्बा जय माँ काली प्रथम प्रणाम करै छी हे । नहि जान हम सेवा पूजा अटपट गीत गबय छी है। सुनलहुँ कतेक अधम के मैया मनवांछित फल दै छी है । पुत्र सम जानि चरण सेवक के जन्मक कष्ट हर...
सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे, हमरा किए विसरै छी हे ठीक है पुत्र अहंकार जननी, से तऽ अहाँ जनै छी हे एहन निष्ठुर किए अहाँ भेलहुँ, कनिको दृष्टि नहि दै छी है सैण-क्षण पल-पल ध्यान कर...