अहँ जगजननी दया के सागर, करखन उतारव पार हे. जननी June 05, 2019 अहँ जगजननी दया के सागर, करखन उतारव पार हे. जननी हमरा नहि अवलम्ब आन अछि, अहँ छी एक आधार है जननी = अछि अपार पाबी ने पार, वह अछि जलधारा ।। कतेक करव करुणा हम हिनका, ई छट बड रखवार है जननी ... Read more