Skip to main content

Posts

Showing posts with the label गौसाउनिक गीत

अहँ जगजननी दया के सागर, करखन उतारव पार हे. जननी

अहँ जगजननी दया के सागर, करखन उतारव पार हे. जननी हमरा नहि अवलम्ब आन अछि, अहँ छी एक आधार है जननी = अछि अपार पाबी ने पार, वह अछि जलधारा ।। कतेक करव करुणा हम हिनका, ई छट बड रखवार है जननी ...