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Showing posts with the label gosaunaki geet

कोन दिन आहे काली तोहर जनम भेल, कोन दिन भेल छठिहार।

कोन दिन आहे काली तोहर जनम भेल, कोन दिन भेल कटिहार । शुक्र दिन आहे सेवक हमरो जनम भेल, बुध दिन भेल छठिहार । पहिरि ओढ़िय कोली गहवर टाढि भेली, करबमे काली के सिंगार । कोन फूल ओढ़न मा...

है माँ विनती करी कर जोड़ि, हे माँ अरज करी कर जोडि ।

है माँ विनती करी कर जोड़ि, हे माँ अरज करी कर जोडि । चानन घसि माँ हे गहबर दौरल, सिरा देल धूमन धूप । बॉटल सूत मैया अँचरी गुथायब, नीचा देव घुँघरू लगाय । करिया छागर सेहो चढायब, करिय म...

हे भवानी दुख हरू माँ पुत्र अपनो जानिके ।

हे भवानी दुख हरू माँ पुत्र अपनो जानिके । दय रहल छी दुख भारी बीच भंवर में आना । आबि आशामे पडल छी की करू हम कहानियाँ । विश्वमाता छी अहाँ माँ आह ! से हम मानिक । कोटिओ न पैर छोड़ब हाथ ...

जय-जय भैरवि असुर-भयावनि, पशुपति-भामिनि माया

( १ ) जय-जय भैरवि असुर-भयावनि, पशुपति-भामिनि माया । हज सुमति वर दिये गोसाउनि, अनुगत गति तुअ पाया । पर रैनि शवासन शोभित, चरण चन्द्रमणि चूडा । दत क दैत्य मारि मुँह मेलल, कतओ उगिलि कै...