हे भवानी दुख हरू माँ पुत्र अपनो जानिके ।
दय रहल छी दुख भारी बीच भंवर में आना ।
आबि आशामे पडल छी की करू हम कहानियाँ ।
विश्वमाता छी अहाँ माँ आह ! से हम मानिक ।
कोटिओ न पैर छोड़ब हाथ राखब छानिक ।
दीन प्रभु हम नित्य पूजा नेम व्रत का ठानी ।
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
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