हम नहि जानल गे माई ।
एहन बर नारद जोहि लौता, देखितहि सब पड़ाद ।
तीन लोक के मालिक कहि-कहि हमरा देल पतिआई ।
अन्तिम पलमे भिखमंगा के लायल यर यनाई
एकदिस गौरी केर मुह तक छी, दोसर बुढे जमा ।
३ देखते मनमे होइत अछि, भरितहुँ जहर-विप छ ।
हम नहि जानल गे माई ।।
Maithli lokgeet
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