कानि कानि कहथि माता सुनु हनुमान यो ।
कोना कऽ बिसरि गेला मोरा भगवान यो 1
हरि विनु सुन भेल सकल जमात यो ।
जल-थल सभ लागय अग्नि समान यो ।
तइयों नहि अधम तन सऽ निकलैए प्राण यो ।
कहथिन सीता दाइ सुनु मन ए हनुमान यो ।
कते दुख कहु हम अपने छी सुजान यो ।
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
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