बजरंगी छी बड़ बलवान, के नहि जानैए ।
फानि सिंधु सीता सुधि लाओल, बचल रामक प्राण
के नहि जानैए ।
देल खसाय औंठी रखलौं अहाँ, दुखी सीमा केर जान
के नहि जानैए ।
खाय सुफल बाटिका उजारल, दसमुख के तोडल शान
के नहि जानैए ।
डाहल सोनाक लंकागढ़, छोड़ि विभीषण के द्वार
के नहि जानैए ।
लाय संजीवन लखन जिआओल, से कोना करू गुणगान
के नहि जानैए ।
Maithli lokgeet
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