बजरंगी छी बड़ बलवान, के नहि जानैए ।
फानि सिंधु सीता सुधि लाओल, बचल रामक प्राण
के नहि जानैए ।
देल खसाय औंठी रखलौं अहाँ, दुखी सीमा केर जान
के नहि जानैए ।
खाय सुफल बाटिका उजारल, दसमुख के तोडल शान
के नहि जानैए ।
डाहल सोनाक लंकागढ़, छोड़ि विभीषण के द्वार
के नहि जानैए ।
लाय संजीवन लखन जिआओल, से कोना करू गुणगान
के नहि जानैए ।
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
Comments
Post a Comment