कोना करू सम्मान महादेव, सम्मानक ओरियान कहाँ
गरोद के अभिलाषा मनमे से जानथि भगवान कहाँ
अपने तऽ एल ई जनि जगमे, आनन्दक हिलकोर भेलड
महिमा अहाँके जगत विदीत अछि, ई जनि जगमे सोर भेल ।।
अपने के रूप अछि गंधर्व, बाघम्बर लेपटौने छो
महिमा अहाँके जगत विदित अछि, असली रूप नुकौने छो ।
स्वागत अछि श्रीमान अहाँके, किन्तु मनोहर अछि गान कहा।
कोना करू सम्मान महादेव, सम्मानक ओरियान कहाँ ॥
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
Comments
Post a Comment