कहू- कहू आहे सखि शम्भु उदेश
कतहु ने
भेटला हमरो महेश
देखलहुँ शिवके घमैत मशान
डिमडिम डमरु बसहा असवार
कहू-कहू, आहे सखि शम्भु उदेश
देखल हर के घुर्मत कैलाश
गले बीच विषधर त्रिशुल भाल
कहू-कहू आहे सखि शम्भु उदेश
कातिक गणपति छथिन अज्ञान
कोना हम छोड़ि शिव के खोजब मशान
कहू-कहू आहे सखि शशु उदेश
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
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