चलु सखि देखय गौरी के बरियाती है ।
देखइते बूढ वर फाटे मोर छाती है।
गाल चोटकल मुँह टुटल छै दतिया हे ।
हँसबो के लुरि नहि विकट सुतिया हे ।
देखि देखि बुढ़ लयला जमइया है ।
माथा पीटि छाती पीटि कानए गौरीक माय है।
चुप करू सखी सब नीति समुझाय है ।
Maithli lokgeet
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