पगिया तोहर गुलबिया है ब्राह्मण
धोतिया तोहर तरंग है ।
घोड़ा तोहर बघेरबा हौ ब्राह्मण
सोने मुठी लागल लगाम हे ।
ताहि घोड़ा चढ़ी चलली ही ब्राह्मण
चलि भेला असला गोहार है।
जहाँ जहाँ देखथि ब्राह्मण दूधपीठी-मधुर
तहाँ तहाँ जीव ललचाए है।
जहाँ जहाँ देखथि ब्राह्मण जोड़ा जनटा
सभक सुनथि गोहार है।
उजरा छागर धुकुर बनाएं
करिया छागर बलिदान है।
कल जोड़ी अबला गोहराबथि
सदा रहियो आंवला पर सहाय है
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