गे माई हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब, मोर गौरी रहती कुमारि ।
गे माई भूत-प्रेत बरिआती अनलनि, मोर जिया गेल डेराइ ।
गे माई गालो चोटकल, मोछो पाकल, पयरोमे फाटल बेमाइ ।
गे माई गौरी लए भागब, गौरी लए जायब, गौरी लए पड़ायब नइहर ।
गे माई भनहि विद्यापति सुनू हे मनाइनि, इहो थिका त्रिभुवननाथ
शुभ-शुभ कए गौरी के बियाहू, तारू होउ सनाथ गे माई
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
Comments
Post a Comment