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गे माई हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब, मोर गौरी रहती कुमारि ।महेशवानी

गे माई हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब, मोर गौरी रहती कुमारि ।
गे माई भूत-प्रेत बरिआती अनलनि, मोर जिया गेल डेराइ ।
गे माई गालो चोटकल, मोछो पाकल, पयरोमे फाटल बेमाइ ।
गे माई गौरी लए भागब, गौरी लए जायब, गौरी लए पड़ायब नइहर ।
गे माई भनहि विद्यापति सुनू हे मनाइनि, इहो थिका त्रिभुवननाथ
शुभ-शुभ कए गौरी के बियाहू, तारू होउ सनाथ गे माई

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