कानि कानि कहधिन सीता माता सुनू सुनू हनुमान यौ
कोना विसरि गेला हमरा के लछमन कोना विसरल श्रीराम यौ
रावणक बोली विषम सन लागय देह भेल गलि खूफतान यौ
कानि कानि कहथिन हनुमत सीता से हमर वचन परमान यो
समुद्रक बाधा दूर भय जायत सेत बन्हौता भगवान 'यौ
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
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