कानि कानि कहधिन सीता माता सुनू सुनू हनुमान यौ
कोना विसरि गेला हमरा के लछमन कोना विसरल श्रीराम यौ
रावणक बोली विषम सन लागय देह भेल गलि खूफतान यौ
कानि कानि कहथिन हनुमत सीता से हमर वचन परमान यो
समुद्रक बाधा दूर भय जायत सेत बन्हौता भगवान 'यौ
Maithli lokgeet
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