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तिलक लगौने धनुष काँध पर दूटा बालक बाढ़ छ ।| भगवानी गीत

तिलक लगौने धनुष काँध पर दूटा बालक बाढ़ छ ।
धूमि रहल छै जनक बागमे फूल तोड़े लेल ठाढ़
पुछै छै त कहै छै जे अवधक राजकुमार छै
श्याम ंग जे सब स सुन्दर ओएह सभक सरदार छ
काल्हि जे बजला राजा जनकजी दुनियामे नहि वीर छ ।
से सुनि कुदि उठला लक्ष्मणजी ई कोन भारी बात छै ।
चुटकी सँ मलि देवइ धनुष के ई कोन भारी बात छ ।
जखन रामजी धनुष तोडल मचि गेल जयजयकार छै।
संग सहेली सीता के कर सुन्दर सन जयमाल छै ।।०।।

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तपस्या के समान है मधुश्रावणी की यह पूजा, 14 दिनों तक महिलाएं नमक नहीं खाती हैं

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