तिलक लगौने धनुष काँध पर दूटा बालक बाढ़ छ ।
धूमि रहल छै जनक बागमे फूल तोड़े लेल ठाढ़
पुछै छै त कहै छै जे अवधक राजकुमार छै
श्याम ंग जे सब स सुन्दर ओएह सभक सरदार छ
काल्हि जे बजला राजा जनकजी दुनियामे नहि वीर छ ।
से सुनि कुदि उठला लक्ष्मणजी ई कोन भारी बात छै ।
चुटकी सँ मलि देवइ धनुष के ई कोन भारी बात छ ।
जखन रामजी धनुष तोडल मचि गेल जयजयकार छै।
संग सहेली सीता के कर सुन्दर सन जयमाल छै ।।०।।
बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...
Comments
Post a Comment