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कखन हरब दुख मोर, हे भोलानाथ । नचारी गीत

             नचारी गीत

कखन हरब दुख मोर, हे भोलानाथ ।
दुखहि जनम भेल दुखहि माल, सुख सपनहु नहि भेल 1
एहि भवसागर थाह कतहु नहि भैरव धरू करुआर ।
भनइ विद्यापति मोर भोलानाथ गति, करव अन्त मोहि पार ।

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