Skip to main content

कि कहू पहु परदेश गेल सजनी गे,आहे सखि किछु ने सोहाय सजनी गे बटगवनी

कि कहू पहु परदेश गेल सजनी गे,

आहे सखि किछु ने सोहाय सजनी गे
फूल केश नीर बहु सजनी गे, काजर गेल दहाय सजनी के। कंगन बहन भार भेल सजनी गे, यौवन भेल उतफाल सजनी गे आंगन मोरा लेखे बिजवान सजनी गे.


पर भेल दिवस अन्हार सजनी गे । जौ प्रीतम नहि आओत सजनी गे, मरब जहर-बिख खाय सजनी गे ।

Comments

Popular posts from this blog

मधुश्रावणी कथा 2 दिन के

बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । नचारी गीत

बम-बम भैरो हो भूपाल, अपनी नगरिया भोला, खेबि लगाबऽ पार । कथी के नाव-नेवरिया, कथी करूआरि, कोने लाला खेवनहारे, कोन उतारे पार । सोने केर नाव-नेवरिया, रूपे करूआरि, भैरो लाला खेवनहार...